शास्त्रों में पीपल के पेड़ को देवताओं का निवास स्थल बताया गया है। पुराणों के अनुसार, पीपल की जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फल में सभी देवताओं से युक्त अच्युत सदा निवास करते हैं। पीपल की पूजा में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इसे साक्षात् विष्णु स्वरूप बताया गया है। इस पवित्र वृक्ष की पूजा करने से मन को शांति मिलती है लेकिन इसके पूजन से जुड़ी एक बात का ध्यान रखना अत्यंत जरूरी है वह यह है कि रविवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा न करें।
पीपल की पूजा में इसका ध्यान रखें
पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं तो ध्यान रखें कि रात आठ बजे के बाद पीपल के पेड़ के आगे दीया न जलाएं। शास्त्रों के अनुसार रात आठ बजे के बाद पीपल के पेड़ में देवी लक्ष्मी की बहन दरिद्रता वास करती है। इसलिए रात के समय पीपल के वृक्ष का पूजन निषेध है।
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इससे प्रसन्न होकर जब ब्रह्मा जी ने उनसे वर मांगने को कहा, तो पिप्लाद ने ब्रह्मदंड मांगा और पीपल के पेड़ में बैठे शनि देव पर ब्रह्मदंड से प्रहार किया। इससे शनि के पैर टूट गए। शनि देव दुखी होकर भगवान शिव को पुकारने लगे।
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भगवान शिव ने आकर पिप्पलाद का क्रोध शांत किया और शनि की रक्षा की। तभी से शनि पिप्पलाद से भय खाने लगे। पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और पीपल के पत्तों को खाकर इन्होंने तप किया था इसलिए माना जाता है कि पीपल के पड़े की पूजा करने से शनि का अशुभ प्रभाव दूर होता है।