Wednesday, October 3, 2018

शिवजी के वरदान से मिले थे पांच पति द्रौपदी को

महाभारत ग्रंथ के अनुसार एक बार राजा द्रुपद ने कौरवो और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य का अपमान कर दिया था। गुरु द्रोणाचार्य इस अपमान को भूल नहीं पाए। इसलिए जब पण्डवों और कौरवों ने शिक्षा समाप्ति के पश्चात गुरु द्रोणाचार्य से गुरु दक्षिणा माँगने को कहा तो उन्होंने उनसे गुरु दक्षिणा में राजा द्रुपद को बंदी बनाकर अपने समक्ष प्रस्तुत करने को कहाँ। 



पहले कौरव राजा द्रुपद को बंदी बनाने गए पर वो द्रुपद से हार गए। कौरवों के पराजित होने के बाद पांडव गए और उन्होंने द्रुपद को बंदी बनाकर द्रोणाचार्य के समक्ष प्रस्तुत किया। द्रोणाचार्य ने अपने अपमान का बदला लेते हुए द्रुपद का आधा राज्य स्वयं के पास रख लिया और शेष राज्य द्रुपद को देकर उसे रिहा कर दिया।
गुरु द्रोण से पराजित होने के उपरान्त महाराज द्रुपद अत्यन्त लज्जित हुये और उन्हें किसी प्रकार से नीचा दिखाने का उपाय सोचने लगे। इसी चिन्ता में एक बार वे घूमते हुये कल्याणी नगरी के ब्राह्मणों की बस्ती में जा पहुँचे। वहाँ उनकी भेंट याज तथा उपयाज नामक महान कर्मकाण्डी ब्राह्मण भाइयों से हुई। 
राजा द्रुपद ने उनकी सेवा करके उन्हें प्रसन्न कर लिया एवं उनसे द्रोणाचार्य के मारने का उपाय पूछा। उनके पूछने पर बड़े भाई याज ने कहा, “इसके लिये आप एक विशाल यज्ञ का आयोजन करके अग्निदेव को प्रसन्न कीजिये जिससे कि वे आपको वे महान बलशाली पुत्र का वरदान दे देंगे।” महाराज ने याज और उपयाज से उनके कहे अनुसार यज्ञ करवाया। Rahu Dosh Nivaran Upay
उनके यज्ञ से प्रसन्न हो कर अग्निदेव ने उन्हें एक ऐसा पुत्र दिया जो सम्पूर्ण आयुध एवं कवच कुण्डल से युक्त था। उसके पश्चात् उस यज्ञ कुण्ड से एक कन्या उत्पन्न हुई जिसके नेत्र खिले हुये कमल के समान देदीप्यमान थे, भौहें चन्द्रमा के समान वक्र थीं तथा उसका वर्ण श्यामल था। उसके उत्पन्न होते ही एक आकाशवाणी हुई कि इस बालिका का जन्म क्षत्रियों के सँहार और कौरवों के विनाश के हेतु हुआ है। बालक का नाम धृष्टद्युम्न एवं बालिका का नाम कृष्णा रखा गया जो की राजा द्रुपद की बेटी होने के कारण द्रौपदी कहलाई। Ek Mukhi Rudraksha ki Pahchan
द्रौपदी पूर्व जन्म में एक बड़े ऋषि की गुणवान कन्या थी। वह रूपवती, गुणवती और सदाचारिणी थी, लेकिन पूर्वजन्मों के कर्मों के कारण किसी ने उसे पत्नी रूप में स्वीकार नहीं किया। इससे दुखी होकर वह तपस्या करने लगी। उसकी उग्र तपस्या के कारण भगवान शिव प्रसन्न हए और उन्होंने द्रौपदी से कहा तू मनचाहा वरदान मांग ले। इस पर द्रौपदी इतनी प्रसन्न हो गई कि उसने बार-बार कहा मैं सर्वगुणयुक्त पति चाहती हूं। Ganesh ji Ko Prasan Karne Ke Upay
भगवान शंकर ने कहा तूने मनचाहा पति पाने के लिए मुझसे पांच बार प्रार्थना की है। इसलिए तुझे दुसरे जन्म में एक नहीं पांच पति मिलेंगे। तब द्रौपदी ने कहा मैं तो आपकी कृपा से एक ही पति चाहती हूं। इस पर शिवजी ने कहा मेरा वरदान व्यर्थ नहीं जा सकता है। इसलिए तुझे पांच पति ही प्राप्त होंगे।
महाभारत की अन्य पौराणिक कहानियाँ :-कुंती तथा पांडवों ने द्रौपदी के स्वयंवर के विषय में सुना तो वे लोग भी सम्मिलित होने के लिए धौम्य को अपना पुरोहित बनाकर पांचाल देश पहुंचे। कौरवों से छुपने के लिए उन्होंने ब्राह्मण वेश धारण कर रखा था तथा एक कुम्हार की कुटिया में रहने लगे। राजा द्रुपद द्रौपदी का विवाह अर्जुन के साथ करना चाहते थे। लाक्षागृह की घटना सुनने के बाद भी उन्हें यह विश्वास नहीं होता था कि पांडवों का निधन हो गया है, अत: द्रौपदी के स्वयंवर के लिए उन्होंने यह शर्त रखी कि निरंतर घूमते हुए यंत्र के छिद्र में से जो भी वीर निश्चित धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ाकर दिये गये पांच बाणों से, छिद्र के ऊपर लगे, लक्ष्य को भेद देगा, उसी के साथ द्रौपदी का विवाह कर दिया जायेगा। ब्राह्मणवेश में पांडव भी स्वयंवर-स्थल पर पहुंचे। कौरव आदि अनेक राजा तथा राजकुमार तो धनुष की प्रत्यंचा के धक्के से भूमिसात हो गये। कर्ण ने धनुष पर बाण चढ़ा तो लिया किंतु द्रौपदी ने सूत-पुत्र से विवाह करना नहीं चाहा, अत: लक्ष्य भेदने का प्रश्न ही नहीं उठा। अर्जुन ने छद्मवेश में पहुंचकर लक्ष्य भेद दिया तथा द्रौपदी को प्राप्त कर लिया। Hanuman Sadhna
कृष्ण उसे देखते ही पहचान गये। शेष उपस्थित व्यक्तियों में यह विवाद का विषय बन गया कि ब्राह्मण को कन्या क्यों दी गयी है। अर्जुन तथा भीम के रण-कौशल तथा कृष्ण की नीति से शांति स्थापित हुई तथा अर्जुन और भीम द्रौपदी को लेकर डेरे पर पहुंचे। उनके यह कहने पर कि वे लोग भिक्षा लाये हैं, Siddh Shani Yantra in Hindi
उन्हें बिना देखे ही कुंती ने कुटिया के अंदर से कहा कि सभी मिलकर उसे ग्रहण करो। पुत्रवधू को देखकर अपने वचनों को सत्य रखने के लिए कुंती ने पांचों पांडवों को द्रौपदी से विवाह करने के लिए कहा। द्रौपदी का भाई धृष्टद्युम्न उन लोगों के पीछे-पीछे छुपकर आया था। वह यह तो नहीं जान पाया कि वे सब कौन हैं, 
पर स्थान का पता चलाकर पिता की प्रेरणा से उसने उन सबको अपने घर पर भोजन के लिए आमन्त्रित किया। द्रुपद को यह जानकर कि वे पांडव हैं, बहुत प्रसन्नता हुई, किंतु यह सुनकर विचित्र लगा कि वे पांचों द्रौपदी से विवाह करने जा रहे हैं। 6 Mukhi Rudraksha Benefits in Hindi
तभी व्यास मुनि ने अचानक प्रकट होकर एकांत में द्रुपद को उन छहों के पूर्वजन्म की कथा सुनायी कि- एक वार रुद्र ने पांच इन्द्रों को उनके दुरभिमान स्वरूप यह शाप दिया था कि वे मानव-रूप धारण करेंगे। उनके पिता क्रमश: धर्म, वायु, इन्द्र तथा अश्विनीकुमार (द्वय) होंगे। भूलोक पर उनका विवाह स्वर्गलोक की लक्ष्मी के मानवी रूप से होगा। Bhoot Pret Tabeej
वह मानवी द्रौपदी है तथा वे पांचों इन्द्र पांडव हैं। व्यास मुनि के व्यवस्था देने पर द्रौपदी का विवाह क्रमश: पांचों पांडवों से कर दिया गया। इस तरह से पांचो पांडवो से विवाह करके द्रौपदी पांचाली कहलाई।



शुगर का इलाज करने के 9 देसी उपाय

शुगर का इलाज करने की सबसे बड़ी औषधि आपके घर की रसोई में ही मौजूद है| शुगर के आयुर्वेदिक इलाज की सबसे सस्ती और सबसे कारगर औषधि है “मैथी के दाने और एलोवेरा का रस”, अगर आपने इन दोनों का सही से तीन महीने तक इस्तेमाल कर लिया तो शुगर की बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी|

देखिये शुगर बहुत खतरनाक बीमारी नहीं है लेकिन इसकी वजह से होने वाली गंभीर बीमारियां बहुत खतरनाक होती हैं| शुगर से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है और व्यक्ति को ब्रेन हैमरेज, किडनी फेल, अंधापन, हार्ट अटैक, जोड़ो का दर्द, लिवर फेल जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं|

जानिए शुगर क्यों हो जाती है?

हम जैसे- जैसे विकसित होते जा रहे हैं ठीक वैसे-वैसे ही हमारी जीवनशैली में परिवर्तन आने लगे हैं| पहले लोग छोटे मोटे काम भी अपने हाथों से करते थे, एक दूसरे से मिलने पैदल यात्रा करने जाते थे परन्तु अब सुख साधन इतने हैं कि हमको कुछ करने की जरुरत ही नहीं है यानि शारीरिक श्रम बिल्कुल खत्म हो चला है|

मैथी के दाने

मैथी आपकी रसोई में भी उपलब्ध होगी और आप बाजार से भी मैथी के दाने खरीद सकते हैं| मैथी के दाने रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में डालकर रख दें| सुबह उठकर खाली पेट इस पानी को पियें और ऊपर से मैथी के दाने चबा जायें| बस इतना सा काम आपको लगातार तीन महीने तक करना है| शुगर की रिपोर्ट एकदम नार्मल आ जाएगी|
जिनकी शुगर हमेशा बढ़ी ही रहती है वे लोग कम से कम 6 महीने तक इसका सेवन करें| ये शुगर की सबसे बड़ी हुए सबसे सस्ती औषधि है| सबसे ख़ास बात ये है कि मैथी का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता|

अब आगे हम आपको कुछ और आयुर्वेदिक तरीके बताते हैं –

एलोवेरा का रस

एलोवेरा के चमत्कारी गुणों से तो पहले ही वाकिफ होंगे| एलोवेरा को लेकर उसको ऊपर से छील लें अब उसके अंदर से जो पारदर्शी जैल निकलता है उसका जूस निकालकर पियें या फिर उसे खा भी सकते हैं| इसका सेवन सुबह खाली पेट करें तो ज्यादा अच्छा है|  Best Treatment of Gathiya

एलोवेरा और हल्दी का मिश्रण

एलोवेरा को छीलकर उसको एक कटोरी में रख लें| अब इस कटोरी में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और चम्मच से एलोवेरा व हल्दी का पेस्ट बना लें| अब इस मिश्रण का सेवन करें और ध्यान रहे कि हल्दी ज्यादा मात्रा में ना डालें अन्यथा यह नुकसान भी कर सकती है|  Arogyavardhini Vati Benefits

मैथी के दाने और त्रिफला चूर्ण

मैथी के दानों का चूर्ण बनाकर उसमें त्रिफला चूर्ण समान मात्रा में मिलाएं| एक चम्मच मैथी का चूर्ण और एक चम्मच त्रिफला चूर्ण एक गिलास पानी में सोने से पहले डाल दें| अब सुबह उठकर इस पानी को पियें और ध्यान दें कि पानी को छानना नहीं है| चूर्ण सहित पानी पी जाइये| शुगर तीन महीने में एकदम ठीक हो जाएगी|

करेले का जूस

करेला शुगर वालों के लिए सबसे बढ़िया सब्जी है| सुबह खाली पेट करेले का जूस निकालकर पियें और अगर जूस ज्यादा कड़वा है तो इसमें थोड़ा पानी मिला लें| चाहें तो करेले के जूस में एलोवेरा जूस मिलाकर सेवन करें इसके चमत्कारी फायदे होते हैं|

जामुन की गुठली

शुगर से पीड़ित व्यक्तियों को जामुन खूब खाने चाहिए ये उनके लिए सबसे अच्छा फल है| जामुन खाकर उसकी गुठली धूप में सूखा लें और उनको पीसकर उसका चूर्ण बना लें| सुबह उठकर खाली पेट गर्म पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करें|

तुलसी की पत्तियां

तुलसी की पत्तियों में एंटी- ऑक्सीडेंट गुण होते हैं| इसके अलावा तुलसी के पत्ते कई रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं| सुबह उठकर अगर खाली पेट तीन चार तुलसी के पत्ते चबा लिए जाएँ तो शुगर एकदम नियंत्रण में रहती है|

ग्रीन टी पियें

ग्रीन टी में मौजूद तत्व शरीर से फालतू फैट को अवशोषित करते हैं और शुगर को नियंत्रित करते हैं| रोजाना दो बार ग्रीन टी पीने से शरीर में शुगर नार्मल हो जाती है और बढ़ता वजन भी नियंत्रण में रहता है|

ज्वारे है दैवीय औषधि

क्या आप जानते हैं कि ज्वारे किसे कहते हैं? जब गेहूं के बीज अंकुरित होने लगते हैं और उनसे छोटी-छोटी पत्तियां निकलना शुरू हो जाती हैं तो इन पत्तियों को ही ज्वारे कहते हैं| ज्वारे शुगर की दैवीय औषधि है| घर पर ही एक मिटटी के बर्तन में थोड़ी दी मिटटी डाल लें और अब इस बर्तन में थोड़े गेहूं में बीज बो दें| जब ये बीज अंकुरित होने लगें और इनसे पत्तियां निकलने लगें तो इन पत्तियों को काट लें और याद रहे कि पत्तियां उखाड़े नहीं, अब इन पत्तियों का सेवन करें और अब कुछ दिन बाद फिर से जब पत्तियां आने लगें तो फिर से उनका सेवन करें| इसे ही ज्वारे कहते हैं|

नीम की पत्तियां

नीम के पत्ते शरीर में इन्सुलिन के निर्माण में सहायक होते हैं और डायबिटीज को बढ़ने नहीं देते| रोजाना खाली पेट ताजा नीम के पत्ते चबाने से शुगर में लाभ होता है और चाहे तो नीम की पत्तियों का रस निकालकर रोजाना एक से दो चम्मच रस पियें|

उच्च फाइबर वाली चीज़ें खाएं

शुगर को ठीक करने का सबसे बढ़िया तरीका है कि फैट वाली चीज़ें कम खाएं और उच्च फाइबर वाली चीज़ें खाएं| सबसे ज्यादा फाइबर होता है मूंग की दाल में, इसके अलावा अन्य सभी दालों में भी फाइबर होता है सबसे कम फाइबर होता है उड़द की दाल में| अनाज में ज्वार में सबसे अधिक फाइबर होता है तो ज्वार की रोटी खाएं| चने में भी फाइबर होता है, जो लोग गेहूं की रोटी खाते हैं वो गेहूं में चने का आटा मिलाकर उसकी रोटी खाएं|