Wednesday, September 9, 2020

भगवान श्री विष्णु जी के प्रिय मंत्र

 गुरुवार के दिन जगत के पालनकर्ता और त्रिदेवों में से एक भगवान श्री हरि विष्णु की अराधना की जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्त‍ि की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

लेकिन अगर आप तनाव में रहते हैं और इससे निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है तो श्री हरि की शरण लें.

श्री हरि के एक मंत्र का जाप आपके तनाव के स्तर को कम कर सकता है.

भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए खासतौर पर विष्णु गायत्री मंत्र महामंत्र माना गया है. क्योंकि जगतजननी गायत्री की 24 देवशक्तियों में भगवान विष्णु एक हैं.


इसके स्मरण मात्र से सारे कार्य बाधा, दु:ख व संताप दूर हो जाते हैं. जानिए यह विष्णु गायत्री मंत्र और विष्णु पूजा की आसान विधि...


जानिये क्यों कहते हैं भगवान विष्णु को 'नारायण' और 'हरि'


स्नान के बाद घर के देवालय में पीले या केसरिया वस्त्र पहन श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल स्नान के बाद केसर चंदन, सुगंधित फूल, तुलसी की माला, पीताम्बरी वस्त्र कलेवा, फल चढ़ाकर पूजा करें. भगवान विष्णु को केसरिया भात, खीर या दूध से बने पकवान का भोग लगाएं.

Siddh Hanuman Yantra 

Siddh Durga Bisa Yantra 

Siddh Hanuman Locket 

Siddh Shiv Tantrik Yantra 

Siddha Laxmi Bisa Yantra 

धूप व दीप जलाकर पीले आसन पर बैठ तुलसी की माला से नीचे लिखे विष्णु गायत्री मंत्र की 1, 3, 5, 11 माला का पाठ यश, प्रतिष्ठा व उन्नति की कामना से करें...

ऊँ नारायणाय विद्महे।

वासुदेवाय धीमहि।

तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

पूजा व मंत्र जप के बाद विष्णु धूप, दीप व कपूर आरती कर देव स्नान कराया जल यानी चरणामृत व प्रसाद ग्रहण करें.


Monday, July 6, 2020

पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है ?

शास्‍त्रों में पीपल के पेड़ को देवताओं का निवास स्‍थल बताया गया है। पुराणों के अनुसार, पीपल की जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फल में सभी देवताओं से युक्त अच्युत सदा निवास करते हैं। पीपल की पूजा में आपको कुछ बातों का ध्‍यान रखना चाहिए।
इसे साक्षात् विष्णु स्वरूप बताया गया है। इस पवित्र वृक्ष की पूजा करने से मन को शांति मिलती है लेकिन इसके पूजन से जुड़ी एक बात का ध्‍यान रखना अत्‍यंत जरूरी है वह यह है कि रविवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा न करें।

पीपल की पूजा में इसका ध्‍यान रखें

पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं तो ध्‍यान रखें कि रात आठ बजे के बाद पीपल के पेड़ के आगे दीया न जलाएं। शास्‍त्रों के अनुसार रात आठ बजे के बाद पीपल के पेड़ में देवी लक्ष्‍मी की बहन दरिद्रता वास करती है। इसलिए रात के समय पीपल के वृक्ष का पूजन निषेध है।
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इससे प्रसन्न होकर जब ब्रह्मा जी ने उनसे वर मांगने को कहा, तो पिप्लाद ने ब्रह्मदंड मांगा और पीपल के पेड़ में बैठे शनि देव पर ब्रह्मदंड से प्रहार किया। इससे शनि के पैर टूट गए। शनि देव दुखी होकर भगवान शिव को पुकारने लगे।

Chandra Dosh Nivaran Upay





भगवान शिव ने आकर पिप्पलाद का क्रोध शांत किया और शनि की रक्षा की। तभी से शनि पिप्पलाद से भय खाने लगे। पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और पीपल के पत्तों को खाकर इन्होंने तप किया था इसलिए माना जाता है कि पीपल के पड़े की पूजा करने से शनि का अशुभ प्रभाव दूर होता है।


Friday, June 12, 2020

ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य सावधानियां, जानिए

चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण धार्मिक द्रष्टि से बहुत महत्व रखते है | ग्रहण काल का समय जहाँ गर्भवती महिलाओं , बीमार और वृद्धों के लिए अशुभ संकेत देने वाला माना गया है वहीं साधकों के लिए ग्रहण काल एक सुनहरे अवसर के रूप में आता है | बड़े-बड़े साधक लम्बे समय से ग्रहण काल(Grahan me Mantra Siddh)का इन्तजार करते है ताकि उस समय वे अपनी साधना में सिद्धि प्राप्त कर सके | धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में किये गये मंत्र जप और यज्ञ से  100 गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है और शीघ्र ही मंत्र भी सिद्ध होते है |

ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य सावधानियां : 


  1. ग्रहन काल आरम्भ होने से समाप्ति के मध्य की अवधि में मंत्र ग्रहण, मंत्रदीक्षा, जप, उपासना, पाठ, हवन, मानसिक जाप, चिन्तन करना कल्याणकारी होता है.

  2. सूर्य ग्रहण अवधि में देव मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है. सूतक समय के बाद स्वयं भी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, तथा देवमूर्तियोम को स्नान करा कर, गंगाजल छिडक कर, नवीन वस्त्र पहनाकर, देवों का श्रंगार करना चाहिए.

  3. देव प्रतिमाओं के अलावा तुलसी वृ्क्ष, शमी वृ्क्ष को स्पर्श नहीं किया जाता है.

  4. ग्रहण के बाद इन सभी पर भी गंगाजल छिडक इन्हें शुद्ध किया जाता है.

  5. ग्रहण काल में अपने इष्ट देव, मंत्र, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का जप दीपक जला कर करना चाहिए.

  6. मंत्रों की सिद्धि के लिये यह समय सर्वथा शुभ होता है.




ग्रहण काल मंत्र सिद्ध करने का बड़ा ही सुनहरा अवसर होता है | इसमें यज्ञ करने से भी बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है | इसलिए यदि आप भी इस अवसर पर मंत्र साधना करना चाहते है तो उपरोक्त लिंक को open करके पोस्ट पढ़ सकते है | 

Wednesday, April 8, 2020

कोरोना में क्वारंटीन के विषय में जानकारी

इधर प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की, उधर पूरे मोहल्ले में हल्ला हो गया. तो लोग एक-दूसरे से अपना पैनिक बांटने लगे. जुनेजा आंटी अपनी पड़ोसन से कहने लगीं, ‘ऐसी बीमारी है कि अगर आपको हो गई. और सरकार को पता चल गया. तो कम से कम 15 दिन के लिए जेल भेज देगी.’
जिस शब्द को आंटी खोज रही थीं, वो असल में ‘क्वारंटीन’ है. मगर उन्होंने कहा ‘जेल’. क्या क्वारंटीन का अर्थ सचमुच जेल होता है? समझेंगे. लेकिन पहले एक कहानी सुनिए.
कहानी 700 साल पहले की. योरप में ‘प्लेग’ महामारी फैली थी. चूहों के शरीर पर बसने वाले पिस्सुओं से इंसानों में आई थी. फैलने का ज़रिया थूक और छींक यानी शरीर से निकले द्रव्यों के कॉन्टैक्ट में आना. इटली में ये बीमारी विदेश से आ रही थी. उस समय व्यापार सारा पानी के जहाज़ों से होता था. तो जो लोग जहाजों से लौटते थे, उनके संक्रमित होने के सबसे ज्यादा चांस थे.
‘क्वारंटीन’ शब्द सुनते ही दिमाग में कई सवाल आते हैं. कुछ सवालों के जवाब आप यहां जान सकते हैं.
1. क्या क्वारंटीन में केवल बीमार लोग रहते हैं?
नहीं, क्वारंटीन का मतलब केवल ऑब्जरवेशन में रखना होता है. आप विदेश से लौटे. खासकर किसी ऐसे देश से जहां बीमारी पहले से थी. तो सरकार की ये जिम्मेदारी हो जाती है कि वो चेक करे कि कहीं आप संक्रमित तो नहीं हैं. सेफ्टी के लिए वो आपको सबसे अलग कर देगी. ताकि जबतक सरकार आपको ऑब्जर्व कर रही है. तबतक ये आपसे किसी और में न जाए. अगर तय दिनों में आपमें कोई संक्रमण नहीं निकला तो आपके जाने दिया जाता है.
2. क्या बीमारी के लक्षण दिखने पर क्वारंटीन करते हैं?
ऐसा कतई नहीं है. क्योंकि कई बीमारियों के लक्षण डेवलप होने में 4 दिन से एक हफ्ता लग सकता है. अगर ढिलाई की तो बहुत बुरा नतीजा हो सकता है. उदाहरण के लिए:
सिंगर कनिका कपूर लंदन से 9 मार्च को लौटीं. सबकी तरह उन्हें भी सेल्फ़-क्वारंटीन की हिदायत दी गई. मगर उनको कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे. तो वो पार्टीज में गईं. जिनमें बड़े-बड़े नेता आए थे. अगर कोई बड़ा नेता संक्रमित हो जाता तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी तक खतरे में आ जाते.
5. क्वारंटीन से खुद को बचा लिया तो क्या होगा?
क्वारंटीन कोई जेल नहीं कि खुद को बचाया जाए. ये सबकी सेफ्टी के लिए लागू किया गया नियम है. मगर इंडिया में ऐसे कई केस आए जब लोगों ने क्वारंटीन से खुद को बचाए रखा. और नतीजा बहुत बुरा हुआ. इसका सबसे बड़े उदाहरण है:
केरल का एक परिवार जो इटली से 29 फरवरी को लौटा. मगर सरकार के बार-बार कहने के बावजूद अपनी ट्रेवल हिस्ट्री शेयर नहीं की. न ही सेल्फ़-क्वारंटीन किया. अपने रिश्तेदारों से मिलते रहे. और ट्रेवल करते रहे. नतीजा ये हुआ कि वो तीनों और उनके 4 और रिश्तेदार संक्रमित पाए गए. उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकतों की वजह से लगभग 12 हजार लोगों को ऑब्जरवेशन में डालना पड़ा. जो कि प्राइमरी या सेकेंडरी तौर पर उनके कॉन्टैक्ट में आए थे. इसमें सरकार की जाने कितनी रिसोर्सेज लग गईं जिन्होंने परिवार के पूरे मूवमेंट को ट्रैक किया. सीसीटीवी फुटेज निकाली.

Friday, February 21, 2020

होली पर्व 2020 | होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें संदेश

Holi Wishes in Hindi

होली का गुलाल हो, रंगों कि बहार हो,
गुजिया कि मिठास हो, एक बात खास हो,
सबके दिल में प्यार हो, यही अपना त्यौहार हो!
मथुरा कि खुशबु, गोकुल क हार,
वृन्दावन कि सुगंध, बरसाने कि फुहार,
राधा का उम्मीद, कान्हा का प्यार,
मुबारक हो आपको Holi का त्यौहार !
होली के इस शुभ अवसर पर,
उल्लास और उमंग से,
हो आपके दिन रंगीन !
Happy Holi 2020
खाकर गुजिया पीकर भंग,
लगा के थोडा, थोडा सा रंग,
बजा के ढोलक और मृदंग,
खेलें होली हम तेरे संग !
Happy Holi 2020
राधा का रंग और कान्हा कि पिचकारी,
प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी,
ये रंग ना जाने कोई जात ना कोई बोली,
मुबारक हो आपको रंगों भरी होली
रंगों कि वर्षा, गुलाल कि फुहार,
सूरज कि किरणें, खुशियों कि बौछार,
चन्दन कि खुशबू, अपनों का प्यार,
मुबारक हो आपको holi का त्यौहार,
Holi में तुम करो total मस्ती,
और तुमको मिले, सबका प्यार और दोस्ती
Happy Holi 2020
होली के इस त्यौहार को, समझो मेरे प्यार को,
यह त्यौहार है, मेरे सच्चे प्यार का इज़हार,
रंगों के त्यौहार में सभी रंगों कि हो भरमार,
ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार,
यही दुआ है, भगवान से हमारी हर बार
खुदा करे हर साल चाँद बन कर आये,
दिन का उजाला शान बनकर आये,
कभी दूर ना हो आपके चहरे से हंसी,
ये होली का त्यौहार ऐसा मेहमान बन कर आये
मक्की कि रोटी, निम्बू का आचार,
सूरज कि किरणें, खुशियों कि बहार,
चाँद कि चांदनी, अपनों का प्यार,
मुबारक हो आपको Holi का त्यौहार

हमेशा मीठी रहे आपकी बोली,
खुशियों से भर जाए आपकी झोली,
आप सब को मेरी तरफ से Happy Holi 2020

Monday, December 16, 2019

चन्द्रग्रहण का राशियों पर प्रभाव

मेषः आपके लिए ग्रहण का फल शुभ रहेगा। आपके काम सफल होंगे। कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी और लाभ मिलेगा।
वृषः आपकी राशि से तीसरे घर में हो रहा चन्द्रग्रहण आपके लिए कई मामलों में अनुकूल रहेगा। कहीं से धन लाभ मिल सकता है।
मिथुनः आपको यात्रा करनी पड़ सकती है। आर्थिक मामलों में सजग रहना होगा, नुकसान हो सकता है।
कर्कः स्वास्थ्य में उतार-चढाव की स्थिति का सामना करना होगा। दुर्घटना के प्रति भी आपको सजग रहने की जरूरत है। गुप्तरोग की शिकायत हो सकती है।
सिंहः आपको धन के मामले में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य प्रभावित होगा। मानसिक चिंता से परेशान हो सकते हैं।
कन्याः यह चन्द्रग्रहण आपके लिए अनुकूल रहेगा। सुख-सुविधा के साधनों में वृद्धि होगी। धन लाभ मिलेगा। पारिवारिक जीवन में सद्भाव बना रहेगा।
तुलाः सेहत का ध्यान रखना होगा। कार्यक्षेत्र एवं जीवन के दूसरे क्षेत्रों में संघर्ष करना पड़ सकता है। किसी बात को लेकर मन में भय बना रहेगा।
वृश्चिकः अकारण ही किसी बात को लेकर परेशान और चिंतित रहेंगे। संतान को कष्ट हो सकता है। खर्चे बढ़ेंगे।
धनुः धन की प्राप्ति होगी लेकिन खर्च भी होगा जिससे बचत में कमी आएगी। विरोधियों से आपको सावधान रहना होगा, परेशान कर सकते हैं।
मकरः पारिवारिक जीवन के मामले में यह ग्रहण शुभ फलदायी नहीं दिख रहा है। दाम्पत्य जीवन में आपसी तालमेल की कमी रह सकती है। विदेश और साझेदारी के काम में दिक्कत आ सकती है।
कुंभः विरोधियों का प्रभाव बढ़ेगा। गुप्त चिंता और परेशानी बनी रह सकती है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता से लिए संघर्ष करना होगा।
मीनः शिक्षा के क्षेत्र में परेशानी हो सकती है। संतान पक्ष को लेकर चिंतित रह सकते हैं। खर्च बढ़ेंगे। कार्यों को पूरा होने में विलंब होगा।
कब है सूतक काल और यह क्या होता है?
सूतक का मतलब अशौच या अशुद्धि। सूतक से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की अशुद्धियां होती है। इस काल में शुभ कार्य करना वर्जित होता है। सूतक किसी व्यक्ति के मौत पर भी लगता है और उसमें पूरी क्रिया के पहले किसी भी तरह की पूजा वर्जित होती है। हिंदू धर्म में सूतक की अवधि को अशुभ माना जाता है और इस दौरान खासकर ग्रहण के वक्त खाना ग्रहण करने की मनाही है।
Surya Grahan Mantra Sidh
Shani Mahadasha
Grah ki Mahadasha
Durga Bisa Yantra
Muktashukti Bhasma ke Labh
Swarnmakshik Bhasma
चंद्र ग्रहण के दौरान सबसे ज्यादा क्या फलदायी होता है?
चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। इस पूरे काल के दौरान जाप, मंत्रोच्चारण, पूजा-पाठ और दान तो फलदायी होता ही है लेकिन धर्म सिंधु के अनुसार ग्रहण मोक्ष के उपरांत हवन करना, स्नान, स्वर्ण दान, तुला दान, गौ दान भी श्रेयस्कर है। साथ ही ग्रहण के दौरान पूरी तन्मयता और संयम से मंत्र जाप करना विशेष फल पहुंचाता है। इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है।

Monday, October 21, 2019

दीपावली पर्व पर माँ लक्ष्मी पूजा विधि

दीपावली का शुभ मुहूर्त आ रहा है और हर कोई चाहता है उसके पास प्रचुर मात्र मे धन हो,  जिससे वह अपने और अपने परिवार के सभी सपने सहजतापूर्वक पूरे कर सके ।  दीपावली के दिन की जाने वाली धन लक्ष्मी साधना आज के युग में कल्पवृक्ष के समान फल देने वाली साधना है । जब सारे रास्ते बंद हो जाएँ तो प्रत्येक ब्यक्ति को लक्ष्मी माँ जो की अद्वितीय शक्ति है, की शरण लेनी ही चाहिए ।  यदि आप स्वयं प्रयत्न करे तो, आप क्या नहीं पा सकते? इसलिए माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति हेतु एकाग्रचित्त हो, यत्नपूर्वक बताई  गयी विधि अनुसार, पूजन-अर्चन करे तो निश्चित ही आपको चमत्कार मिलेगा । शुद्ध एवं अभिमंत्रित  दीपावली पूजन सामग्री हेतु यहाँ  पर क्लिक कर प्राप्त करे | इसमें आपको मिलेगा सम्पूर्ण श्रीयंत्र, कमल गट्टे की माला,  कौड़ी, गोमती चक्र एवं स्फटिक गणेश  
लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए, जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और शास्त्रानुसार लगभग 1 घण्टे 29 मिनट तक रहता है । कुछ लक्ष्मी स्त्रोतो मे लक्ष्मी पूजा को करने के लिए महानिशीथ काल भी बताया गया हैं। शास्त्रानुसार महानिशीथ काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानकारी रखते हैं, उनके लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त बताया गया है। सामान्य लोगों के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही पूर्णतः उपयुक्त हैं, जब स्थिर लग्न होता है। स्थिर लग्न मे धन संपत्ति की देवी माँ लक्ष्मी एवं बुद्धि प्रदाता व विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन करने से लक्ष्मी व बुद्धि की स्थिरता मिलती है | दीवाली मे लक्ष्मी-गणेश पूजा को कैसे करना चाहिए, आइये जानते है।
Kamakhya Mantra

Diwali Laxmi Mantra

Totke For Love

Kamdev Mantra

Laxmi Mantra Hindi

लक्ष्मी पूजा की सामग्री

रोली, अक्षत, फल, फूल, माला, मिठाई, धुप, इत्र (खुशबू), लकड़ी की चौकी, लाल वस्त्र (कपड़ा) चौकी पर बिछाने के लिए, घी, दीया, अगरबत्ती, कमल का फूल, चांदी का सिक्का या अगर यह उपलब्ध ना हो तो कुछ पैसे रखे