Friday, June 12, 2020

ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य सावधानियां, जानिए

चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण धार्मिक द्रष्टि से बहुत महत्व रखते है | ग्रहण काल का समय जहाँ गर्भवती महिलाओं , बीमार और वृद्धों के लिए अशुभ संकेत देने वाला माना गया है वहीं साधकों के लिए ग्रहण काल एक सुनहरे अवसर के रूप में आता है | बड़े-बड़े साधक लम्बे समय से ग्रहण काल(Grahan me Mantra Siddh)का इन्तजार करते है ताकि उस समय वे अपनी साधना में सिद्धि प्राप्त कर सके | धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में किये गये मंत्र जप और यज्ञ से  100 गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है और शीघ्र ही मंत्र भी सिद्ध होते है |

ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य सावधानियां : 


  1. ग्रहन काल आरम्भ होने से समाप्ति के मध्य की अवधि में मंत्र ग्रहण, मंत्रदीक्षा, जप, उपासना, पाठ, हवन, मानसिक जाप, चिन्तन करना कल्याणकारी होता है.

  2. सूर्य ग्रहण अवधि में देव मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है. सूतक समय के बाद स्वयं भी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, तथा देवमूर्तियोम को स्नान करा कर, गंगाजल छिडक कर, नवीन वस्त्र पहनाकर, देवों का श्रंगार करना चाहिए.

  3. देव प्रतिमाओं के अलावा तुलसी वृ्क्ष, शमी वृ्क्ष को स्पर्श नहीं किया जाता है.

  4. ग्रहण के बाद इन सभी पर भी गंगाजल छिडक इन्हें शुद्ध किया जाता है.

  5. ग्रहण काल में अपने इष्ट देव, मंत्र, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का जप दीपक जला कर करना चाहिए.

  6. मंत्रों की सिद्धि के लिये यह समय सर्वथा शुभ होता है.




ग्रहण काल मंत्र सिद्ध करने का बड़ा ही सुनहरा अवसर होता है | इसमें यज्ञ करने से भी बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है | इसलिए यदि आप भी इस अवसर पर मंत्र साधना करना चाहते है तो उपरोक्त लिंक को open करके पोस्ट पढ़ सकते है | 

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