Wednesday, April 8, 2020

कोरोना में क्वारंटीन के विषय में जानकारी

इधर प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की, उधर पूरे मोहल्ले में हल्ला हो गया. तो लोग एक-दूसरे से अपना पैनिक बांटने लगे. जुनेजा आंटी अपनी पड़ोसन से कहने लगीं, ‘ऐसी बीमारी है कि अगर आपको हो गई. और सरकार को पता चल गया. तो कम से कम 15 दिन के लिए जेल भेज देगी.’
जिस शब्द को आंटी खोज रही थीं, वो असल में ‘क्वारंटीन’ है. मगर उन्होंने कहा ‘जेल’. क्या क्वारंटीन का अर्थ सचमुच जेल होता है? समझेंगे. लेकिन पहले एक कहानी सुनिए.
कहानी 700 साल पहले की. योरप में ‘प्लेग’ महामारी फैली थी. चूहों के शरीर पर बसने वाले पिस्सुओं से इंसानों में आई थी. फैलने का ज़रिया थूक और छींक यानी शरीर से निकले द्रव्यों के कॉन्टैक्ट में आना. इटली में ये बीमारी विदेश से आ रही थी. उस समय व्यापार सारा पानी के जहाज़ों से होता था. तो जो लोग जहाजों से लौटते थे, उनके संक्रमित होने के सबसे ज्यादा चांस थे.
‘क्वारंटीन’ शब्द सुनते ही दिमाग में कई सवाल आते हैं. कुछ सवालों के जवाब आप यहां जान सकते हैं.
1. क्या क्वारंटीन में केवल बीमार लोग रहते हैं?
नहीं, क्वारंटीन का मतलब केवल ऑब्जरवेशन में रखना होता है. आप विदेश से लौटे. खासकर किसी ऐसे देश से जहां बीमारी पहले से थी. तो सरकार की ये जिम्मेदारी हो जाती है कि वो चेक करे कि कहीं आप संक्रमित तो नहीं हैं. सेफ्टी के लिए वो आपको सबसे अलग कर देगी. ताकि जबतक सरकार आपको ऑब्जर्व कर रही है. तबतक ये आपसे किसी और में न जाए. अगर तय दिनों में आपमें कोई संक्रमण नहीं निकला तो आपके जाने दिया जाता है.
2. क्या बीमारी के लक्षण दिखने पर क्वारंटीन करते हैं?
ऐसा कतई नहीं है. क्योंकि कई बीमारियों के लक्षण डेवलप होने में 4 दिन से एक हफ्ता लग सकता है. अगर ढिलाई की तो बहुत बुरा नतीजा हो सकता है. उदाहरण के लिए:
सिंगर कनिका कपूर लंदन से 9 मार्च को लौटीं. सबकी तरह उन्हें भी सेल्फ़-क्वारंटीन की हिदायत दी गई. मगर उनको कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे. तो वो पार्टीज में गईं. जिनमें बड़े-बड़े नेता आए थे. अगर कोई बड़ा नेता संक्रमित हो जाता तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी तक खतरे में आ जाते.
5. क्वारंटीन से खुद को बचा लिया तो क्या होगा?
क्वारंटीन कोई जेल नहीं कि खुद को बचाया जाए. ये सबकी सेफ्टी के लिए लागू किया गया नियम है. मगर इंडिया में ऐसे कई केस आए जब लोगों ने क्वारंटीन से खुद को बचाए रखा. और नतीजा बहुत बुरा हुआ. इसका सबसे बड़े उदाहरण है:
केरल का एक परिवार जो इटली से 29 फरवरी को लौटा. मगर सरकार के बार-बार कहने के बावजूद अपनी ट्रेवल हिस्ट्री शेयर नहीं की. न ही सेल्फ़-क्वारंटीन किया. अपने रिश्तेदारों से मिलते रहे. और ट्रेवल करते रहे. नतीजा ये हुआ कि वो तीनों और उनके 4 और रिश्तेदार संक्रमित पाए गए. उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकतों की वजह से लगभग 12 हजार लोगों को ऑब्जरवेशन में डालना पड़ा. जो कि प्राइमरी या सेकेंडरी तौर पर उनके कॉन्टैक्ट में आए थे. इसमें सरकार की जाने कितनी रिसोर्सेज लग गईं जिन्होंने परिवार के पूरे मूवमेंट को ट्रैक किया. सीसीटीवी फुटेज निकाली.

1 comment:


  1. baglamukhi sadhna प्राचीन शक्तिशाली मां बगलामुखी साधना ph.85280 57364https://gurumantrasadhna.com/baglamukhi-sadhna/

    ReplyDelete