Friday, July 26, 2019

प्राचीन मिस्र के ऐसे रोचक तथ्य , जिन्हें सुनकर आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे

पूरी दुनिया अजूबों और चमत्कारों से भरी पड़ी है. दुनिया में कुल आठ अजूबे हैं. लगभग 5000 साल पुरानी मिश्र की सभ्यता के पिरामिड इन्हीं अजूबों में से एक हैं. वैसे देखा जाए तो मिस्र अपनी ममी, फराओ और पिरामिड के लिए विख्यात है. लेकिन यहां के इतिहास से जुड़ी अनेक कहानियां हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित करती हैं. लेकिन आज हम आपको प्राचीन सभ्यता के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे.

मिस्र के निवासी बालों से करते थे नफ़रत.
मिस्र सभ्यता के लोग बालों से बेइंतहा नफ़रत करते थे. बालों के प्रति उनकी नफ़रत इतनी थी कि जितनी दो दुश्मन भी आपस में नहीं करते होंगे. उनके मुताबिक, शरीर पर बाल होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. इसलिए वो लोग शरीर से हर तरह के बाल को साफ़ कर देते थे. मिस्र के लोगों की फोटोज़ में सिर पर जो बाल नज़र आते हैं, वो असली नहीं, बल्कि विग हैं. ये लोग विग को टोपी की तरह पहनते थे, वो भी सिर्फ़ इसलिए ताकि सूर्य की सीधी धूप उनके सिर पर न पड़े.

महत्त्वपूर्ण था मुंह को साफ़ रखना.

इन लोगों के लिए दांतों को साफ़ रखना इतना महत्त्वपूर्ण था कि वो ममियों को टूथ पिक के साथ दफनाते थे. माना जाता है कि प्राचीन मिस्र के निवासियों ने ही एक तरह की टूथपेस्ट की शुरुआत की थी. इसे बनाने में वे बैल के खुरों का पाउडर, जले हुए अंडे की छाल तथा राख के मिश्रण का प्रयोग करते थे.

 मिस्र के अधिकतर निवासी ईसाई थे.

माना जाता है कि सन् 400 से 800 के बीच मिस्र के ज़्यादातर लोग ईसाई धर्म के अनुयायी थे. लेकिन 10वीं सदी के मध्य में मुसलमानों के हमले के बाद बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन हुआ और उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया. बाद में उनकी कॉप्टिक भाषा की जगह भी अरबी भाषा ने ले ली.

मोटे होते थे मिस्र के फराओ.

वैसे तो प्राचीन मिस्र के चित्रों में आपने देखा ही होगा कि यहां के फराओ पतले और तन्दुरुस्त होते थे, लेकिन ममियों के परीक्षण के बाद यह बात सामने आई कि फराओ की कमर चौड़ी होती थी. उनकी खुराक में शराब, शहद, बीयर तथा ब्रेड और अधिक चीनी वाले पदार्थ थे. उनमें से कई मधुमेह के शिकार भी थे.

गणित के ज्ञाता होते थे मिस्र निवासी.

मिस्र के निवासी गणित में काफी तेज होते थे. उनके द्वारा बनाई गई संरचनाओं से यह साबित होता है कि गणित और वास्तु कला में वो बहुत तेज़ और निपुण थे.







पहला गर्भ-प्रतिरोधक बना था मिस्र में.
ये बात बेहद रोचक है कि गर्भधारण से बचने के लिए प्राचीन मिस्रवासी मिट्टी, शहद और मगरमच्छ के गोबर का एक मिश्रण बनाते थे. उस मिश्रण को महिला की योनि में डाल देते थे, जिससे महिला गर्भवती नहीं होती थी. इनका मानना था कि मगरमच्छ का गोबर एसिडिक होता है, जो शुक्राणुओं को मारता है.

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